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Saturday, March 26, 2011

देश की एकता का सूत्र : नागरी लिपि.

भारत भर की एक लिपि : नागरी

भारत की राष्टीय एकता और पारस्परिक व्यवहार के लिए भारतवासियों ने राष्ट्रभाषा के तौर पे हिन्दी को मान्य किया है. जिन कारणों से 'सबकी बोली' के रूप में हिन्दी स्वीकार हुआ है, उन्हीं कारणों से नागरी का भी 'सबकी लिपि' के तौर पर स्वीकार होना चाहिए.

भारत की एकता के लिए हिन्दी भाषा जितना काम देगी, उससे ज्यादा देवनागरी लिपि काम देगी. एक जमाने में संस्कृत ने जोड़ने का काम किया था, आज हिन्दी भाषा वह काम नहीं कर पा रही है. क्योकि हिन्दीवाले दूसरी भाषा सीखते नहीं और कहते हैं कि दक्षिण वाले हिन्दी सीखें. इसलिए अभी जोड़ने का काम हिन्दी के बदले नागरी लिपि ही ज्यादा कर पायेगी.

आज यूरोप में एक होने की इच्छा जाग रही है. छोटे छोटे देशों का एक कॉमन मार्केट बना है, तो आगे जाकर संरक्षणआदि बातें भी कॉमन हो सकेंगी .

एस भावना को मदद करनेवाली एक कॉमन लिपि, रोमन लिपि वहाँ चलती है, इसलिए वे एक - दुसरे की भाषा कुछ दिनों में सिख सकते हैं.

कुछ लोग अपने यहाँ भी देवनागरी के बजाय रोमन लिपि को कॉमन करने की बात करते हैं. रोमन लिपि में अनेक गुण हैं, परन्तु अनेक दोष भी हैं. उन दोषों से थककर बनार्ड शा ने तो अंग्रेजी के लिए कोई नयी लिपि ढूंढ़ ली जाये ऐसा चाहा था और उसके लिए अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा भी अलग रखा था. उस सन्दर्भ में जो लिपि सुझाई गयी थी , उसका नमूना मुझे 'लन्दन टाइम्स ' में देखने को मिला तो उसमे मैंने पाया कि उसका रोमन के साथ विशेष साम्य नहीं था, बल्कि उसमे नगरी के गुण लाने का प्रयत्न किया गया था, जबकि अपने यहाँ लोग रोमन लिपि सुझा रहे हैं!

-विनोबा भावे कि पुस्तक शिक्षण - विचार से साभार .

उनकी बात सत्य प्रतीत हो रही है यूरोप कि मुद्रा यूरो एक हो चुकी है. मैं भी दक्षिण भारतीये भाषाएँ , बंगला , उर्दू आदि सिखाना चाहता हूँ पर लिपि कि वजह से सीखना मुश्किल लगता है. अंग्रेजी को भी नगरी भाषा में लिखा जाये तो उसे हम आसानी से सिख सकते हैं. मुझे आशा है कि हम अगर अपने राष्ट्र कि लिपि नागरी कर देते हैं और सभी भाषाओँ को नागरी में लिखना शुरू कर देते हैं तो अन्य भाषाएँ सिखाना आसान भी हो जायेगा और राष्ट्रीय एकता का एक सूत्र भी मिल जायेगा . संभव है नागरी लिपि की क्षमता को देखते हुए बाकि दुनिया भी उसे अपनाने की सोंचे, पर पहले पहल हमें ही करनी होगी.

एक सूत्र में बांध सकेगी यह अपनी नागरी लिपि,

अन्य भाषा समुंद्र समा जाएगी ऐसी अपनी सीपी.

सीखना हर बोली आसान बना देगी यह देव नागरी,

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम सबको मिला देगी ये गगरी.

इंग्लिश मे बी रिटेन इजली इन देव नागरी आल्सो,

उर्दू के अलफ़ाज़ खूबसूरत बोल उठे अल्लाह हो....

आमी बंगला जान जामी जब देवनागरी कोई लिखिन,

पंजाबी मराठी तेलगु तमिल बोलने में लगे कुछ ही दिन.

आप सबों की क्या राय है?

व्हाट इज योर ओपीनियन?

1 comment:

  1. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

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